वकील को झुटे मामले में फसाणे वाले पूर्व आय.पी. एस अधिकारी को सजा.

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कौन है पूर्व IPS अधिकारी संजीव भट्ट जिसने 1.15 किलोग्राम अफीम रख वकील को था फंसाया, चर्चा में रहा था 1996 का मामला

अमदाबाद.   गुजरात के बनासकांठा जिले की एक सत्र अदालत ने गुरुवार को पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को 20 साल जेल की सजा सुनाई है।भट्ट पर 1996 में राजस्थान के एक वकील को फंसाने के लिए ड्रग्स प्लांट करने का आरोप लगा है। भट्ट को बुधवार को दोषी ठहराने वाली अदालत ने अपने 700 पन्नों के आदेश में कहा कि पूर्व पुलिस अधिकारी ने अपने कार्यालय और शक्ति का दुरुपयोग किया।
अमदाबाद गुजरात के बनासकांठा जिले की एक सत्र अदालत ने गुरुवार को पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को 20 साल जेल की सजा सुनाई है। इसके अलावा भट्ट पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और जुर्माना नहीं भरने पर उन्हें एक साल की अतिरिक्त जेल का सामना करना पड़ेगा।<span;>भट्ट पर 1996 में राजस्थान के एक वकील को फंसाने के लिए ड्रग्स प्लांट करने का आरोप लगा है। भट्ट को बुधवार को दोषी ठहराने वाली अदालत ने अपने 700 पन्नों के आदेश में कहा कि पूर्व पुलिस अधिकारी ने अपने कार्यालय और शक्ति का दुरुपयोग किया।

बता दें कि किसी आपराधिक मामले में भट्ट की यह दूसरी सजा है। भट्ट को पहले 1990 के जामनगर हिरासत में मौत के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। बनासकांठा की पालनपुर अदालत ने आदेश दिया कि जेल की दोनों सजाएं लगातार चलेंगी, इसका मतलब है कि 20 साल की उम्रकैद की सजा खत्म होने के बाद शुरू होगी।

क्या है 1996 का मामला?

1996 में भट्ट ने राजस्थान के पाली के वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित के होटल के कमरे में ड्रग्स रखकर उसे एनडीपीएस एक्ट के तहत फंसाने की साजिश रची थी। उस समय वह बनासकांठा के पुलिस अधीक्षक थे।

कौन है पूर्व IPS अधिकारी संजीव भट्ट जिसने 1.15 किलोग्राम अफीम रख वकील को था फंसाया, चर्चा में रहा था 1996 का मामला

गुजरात के बनासकांठा जिले की एक सत्र अदालत ने गुरुवार को पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को 20 साल जेल की सजा सुनाई है।भट्ट पर 1996 में राजस्थान के एक वकील को फंसाने के लिए ड्रग्स प्लांट करने का आरोप लगा है। भट्ट को बुधवार को दोषी ठहराने वाली अदालत ने अपने 700 पन्नों के आदेश में कहा कि पूर्व पुलिस अधिकारी ने अपने कार्यालय और शक्ति का दुरुपयोग किया।

भट्ट पर 1996 में राजस्थान के एक वकील को फंसाने के लिए ड्रग्स प्लांट करने का आरोप लगा है। भट्ट को बुधवार को दोषी ठहराने वाली अदालत ने अपने 700 पन्नों के आदेश में कहा कि पूर्व पुलिस अधिकारी ने अपने कार्यालय और शक्ति का दुरुपयोग किया।

बता दें कि किसी आपराधिक मामले में भट्ट की यह दूसरी सजा है। भट्ट को पहले 1990 के जामनगर हिरासत में मौत के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। बनासकांठा की पालनपुर अदालत ने आदेश दिया कि जेल की दोनों सजाएं लगातार चलेंगी, इसका मतलब है कि 20 साल की उम्रकैद की सजा खत्म होने के बाद शुरू होगी।

क्या है 1996 का मामला?
1996 में भट्ट ने राजस्थान के पाली के वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित के होटल के कमरे में ड्रग्स रखकर उसे एनडीपीएस एक्ट के तहत फंसाने की साजिश रची थी। उस समय वह बनासकांठा के पुलिस अधीक्षक थे।

संजीव भट्ट की 2015 से शुरू हुई उल्टी गिनती

2015 में भट्ट को पुलिस बल से बर्खास्त कर दिया गया था। वह 2018 से सलाखों के पीछे हैं। पिछले साल, उन्होंने मुकदमे को स्थानांतरित करने और ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश के खिलाफ पक्षपात का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। SC ने उनकी याचिका खारिज कर दी और 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। भट्ट को 1990 में जामनगर में हिरासत में मौत के एक मामले में हत्या का भी दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। भट्ट 27 फरवरी, 2002 को गोधरा ट्रेन जलाने के बाद हुई हिंसा की साजिश के संबंध में गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी और अन्य को फंसाने के लिए कथित तौर पर गढ़े गए सबूतों से संबंधित आपराधिक आरोपों से भी जूझ रहे हैं।

क्या है भट्ट पर आरोप?

1996 में राजस्थान के एक वकील को झूठा फंसाने की साजिश रची थी। पुलिस ने पालनपुर के एक होटल के कमरे से ड्रग्स जब्त किया था, जहां वकील रह रहा था। इस मामले में भट्ट को लगातार 20 साल की सजा काटनी होगी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जे एन ठक्कर ने भट्ट को बुधवार को नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया।
1.15 किलोग्राम अफीम रखने के आरोप में हुई थी गिरफ्तारी
पुलिस ने वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित को पालनपुर के एक होटल के कमरे में 1.15 किलोग्राम अफीम रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस दौरान भट्ट 1996 में बनासकांठा एसपी के रूप में कार्यरत थे। राजपुरोहित को एनडीपीएस अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। एक निरीक्षक आईबी व्यास ने वकील के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में, व्यास ने सीआरपीसी धारा 169 के तहत दायर एक रिपोर्ट में स्वीकार किया कि होटल के कमरे में रहने वाला व्यक्ति राजपुरोहित नहीं था। अदालत द्वारा वकील को बरी किए जाने के बाद, उसने भट्ट, व्यास, गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आर आर जैन और अन्य के खिलाफ राजस्थान की एक मजिस्ट्रेट अदालत में शिकायत दर्ज की। वकील ने आरोप लगाया कि एक विवादित संपत्ति को लेकर जज के आदेश पर उन्हें झूठा फंसाया गया था।

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